मचल के जब भी आँखों से छलक जाते हैं दो आँसू सुना है आबशारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
खुदारा अब तो बुझ जाने दो इस जलती हुई लौ को चरागों से मज़ारों को बड़ी तकलीफ़ होती है कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे है क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
तुम्हारा क्या तुम्हें तो राह दे देते हैं काँटे भी मगर हम खांकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
वो दिल ही क्या जो तुझसे मिलने की दुआ न करे,
ए सनम.......
में तुझको भूल कर जिन्दा रह सकूं ऐसा रब्ब न करे.
इतने हसीं चेहरे को देख कर चाँद भी सरमा गया,
आया मेरे पास और चुपके से फार्मा गया,
की जा रहा हु मैं छुपाने को अपनी ये खूबसूरती,
क्यों की मुझ से भी हसीन कोई आया और इस जहां पर छा गया
Kuchh Nasha TIRANGE ki Aan kaa hai,
Kuchh Nasha MATRABHUMI ki Shaan ka hai,
Lahrayenge Hum har Jagah yeh TIRANGA,
Nasha Yeh HINDUSTAN ki Shaan kaa hai.