त्याग दी सब ख्वाहिशें
कुछ अलग करने के लिए
“राम” ने खोया बहुत कुछ
“श्री राम” बनने के लिए
किसी भी मुशकिल का अब किसी को हल नही मिलता ,
शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नही निकलता
बेटा : पापा एक बात बोलू?
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पापा : हा
बेटा : फेसबुक पर मेरे 15 फेक आईडी है
पापा : हरामखोर तू मुझे क्यों बता रहा है
बेटा : आप जिस रिया को 10 दिन से चाय पे बुला रहे है वो मै ही हु
पापा : दे थप्पड़ दे लात दे थप्पड़ दे लात
गुज़रे दिनों की भूली हुई बात की तरह,आँखों में जागता है कोई रात की तरह,उससे उम्मीद थी की निभाएगा साथ वो,वो भी बदल गया मेरे हालात की तरह।
जीत किसके लिए,हार किसके लिए,जिन्द गी भर यह तकरार किसके लिए,जो भी आया है वो जाऐगा एक दिन,फिर ये अहंकार किसके लिए।..