Magar
rani sirf badsah ki hi hoti haii..
बात दिन की नहीं, अब रात से डर लगता है
घर है कच्चा मेरा बरसात से डर लगता है
प्यार को छोड़ कर तुम और कोई बात करो
अब मुझे प्यार की हर बात से डर लगता है
बिखरे थे जो अल्फ़ाज इस कायनात मेंसमेंटा है उन्हें चंद पन्नों की किताब मेंअब दुआ नहीं मांगता बस पूंछता हुं खुदा सेअभी कितनी सांसे और हैं हिसाब में..??
एक पागल आइने में खुद को देख
कर सोचने लगा यार इसको कहीं देखा हूँ।
काफी देर टेंसन में सोचते सोचते-----
धत्त तेरी की ये तो वही है
जो उस दिन मेरे साथ बाल कटवा रहा था
मैंने जिन्दगी से पूछा..सबको इतना दर्द क्यों देती हो ?जिन्दगी ने हंसकर जवाब दिया..मैं तो सबको ख़ुशी ही देती हु,पर एक की ख़ुशी दुसरे का दर्द बन जाती है !!