Ajeeb halaat ho gayi hai dil ki,
Na tu iski hui aur na ye mera raha.
मोहब्बत में दिल का हर एहसास बहुत अनमोल है… कौन कहता है यह के मोहब्बत हमें, सिर्फ जुदाई देगी…
मैं कुछ लम्हा और तेरे साथ चाहता था;
आँखों में जो जम गयी वो बरसात चाहता था;
सुना हैं मुझे बहुत चाहती है वो मगर;
मैं उसकी जुबां से एक बार इज़हार चाहता था।
तुम्हें गुमां है कि मैं जानता नहीं कुछ भी,मुझे ख़बर है कि रस्ता बदल रहे हो तुम।
दूर हो जाने की तलब है तो शौक से जा…
बस याद रहे की मुड़ कर देखने की आदत इधर भी नही…