वफ़ा ढूढने निकला था ग़ालिब WiFi मिल गया , उधर ही बैठ गया...
चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो,कुछ यूँ चला है तेरे ‘इश्क’ का जादू,सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।
तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब,कि सारी उम्र हम अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे।
लड़का: में तुमसे शादी नही कर सकता मेरे घर वाले मना कर रहे हे
लड़की: कोन कोन हे तुम्हारे घर में??
लड़का: एक बीवी और दो बच्चे।।
Vo samjhta hai ki har shakhs badal jata hai…..
Ussey lagta hai zamana us ke jaisa hai….