सीढ़िया उन्हें मुबारक हो जिन्हें छत तक जाना है|मेरी मंजिल तो आसमान है, रास्ता मुझे खुद बनाना है|
जो भी आता है एक नयी चोट दे के चला जाता है ए दोस्त,….
मै मज़बूत बहोत हु लेकिन कोई पत्थर तो नहीं,….
उमीद तो हमने ये की थी,
में राँझा तेरा तू मेरी हीर बने,
पर शायद खुद को ये मंज़ूर न था,
की तू मेरी तकदीर बने!
पत्नि सो रही थी, उसके पैरो के पास एक नागिन कुण्डली लगा के बैठी थी।
पति धीरे से बोला : डस ले…. डस ले….
नागिन बोली:
कमीने!
चरण स्पर्श करने आई हूँ।
गुरु हैं हमारी।
आज का ज्ञाननक़ल सिर्फ इतनी ही करवानी चाहिए की स्टूडेंट पास हो जाये,ना कि टॉप ही कर ले।