रोज़ यही शिकवा आगोश में खिलते क्यूँ नहीं,
मुलाक़ात करते हो आए दिन मिलते क्यूँ नहीं.
अब शामे खत्म तुमसे,अब सुबह शुरू तुमसे ,बचे निशा के कुछ पल,उसमे नींद भी तुमसे,सोयी आँखों के सपने भी तुमसे l
कितना रोया था मैं तेरी खातिर
अब सोचता हूँ तो हंसी आती है ..
दुआ है कि तुझे हर कोई प्यार करे😘पर बद्दुआ ये भी है कि कोई मेरी तरह ना करे 💔…!!
दुआ है कि तुझे हर कोई प्यार करे
😘पर बद्दुआ ये भी है
कि कोई मेरी तरह ना करे 💔…!!
"हर सुबह अंतिम और शाम आख़री हो सकती है,दो पल की ज़िंदगी, एक पल में बड़ी हो सकती है,
श्याम तेरी बंसी पागल कर जाती है,
बोल तेरी मीठी घायल कर जाती है l
वो गोरे होते तो क्या होते,
सांवले रंग पे ही दुनिया मर जाती है l