तेरे आगोश में मिल जाये पनाहहम इतने खुश नसीब कहाँ
तेरे आगोश में मिल जाये पनाह
हम इतने खुश नसीब कहाँ
अंदाज़ भी निराला है उनका
वो हो कर खफा मुझ से
मेरे गुमशुदगी की वजह पूछते हैं
मेरा दिल ...तो तुम्हारे शहर के नाम से ही धड़कने लगता है।
"सारे गुनाहों का हिसाब,क्या एक दिन में ले लेगा,ऐ खुदा अभी बक्श दे,कुछ काम जरुरी बाकी है l"
"तुम्हारे साथ जिंदगी आसान लगती है,ऐसे जाने क्यों, बहुत परेशान लगती है l"