इश्क है या कुछ और ये तो मुझे पता नहीं,
मगर मेरे दिल को जो सुकून तेरे होने से है,
वो किसी और से नहीं !
"अपने जज़्बात को अल्फ़ाज़ में
तब्दील करना ही शायरी है।"
जब मैं डूबा तो समुन्दर को भी हैरत हुयी,
अजीब शख्स है किसी को पुकारता भी नहीं।
“नज़रे मिले तो प्यार हो जाता है !
पलके उठे तो इजहार हो जाता है !
ना जाने क्या कशिश है चाहत मैं !
की कोई अंजान भी हमारी जिंदगी का हकदार हो जाता है।
कहने को बहुत कुछ बाकी है |
तेरे साथ जिंदगी जीना बाकी है |
खुद को खो के पाया है तुझे |
यही बात तुजे समजना बाकी है |
अभी मेरे इश्क़ से अनजान हो तुम
मेरे लिए खुदा का दिया इनाम हो तुम
तुम मेरे हो मेरे हिस्से आओगे
मेरे लिए जारी एक फरमान हो तुम