"अपने जज़्बात को अल्फ़ाज़ में
तब्दील करना ही शायरी है।"
उन्होंने पूछा तोहफे में क्या चाहिए आपको
हमने कहा वो मुलाकात जो कभी
खत्म ना हो !
“नज़रे मिले तो प्यार हो जाता है !
पलके उठे तो इजहार हो जाता है !
ना जाने क्या कशिश है चाहत मैं !
की कोई अंजान भी हमारी जिंदगी का हकदार हो जाता है।
अभी मेरे इश्क़ से अनजान हो तुम
मेरे लिए खुदा का दिया इनाम हो तुम
तुम मेरे हो मेरे हिस्से आओगे
मेरे लिए जारी एक फरमान हो तुम
रिश्ते किसी से कुछ यूँ निभा लो
की उसके दिल के सारे गम चुरा लो
इतना असर छोड़ दो किसी पर अपना
के हर कोई कहे हमें भी अपना बना लो …
कुछ जख्म सदियों बाद तक भी ताजा रहते हैं
वक़्त के पास भी हर मर्ज़ का इलाज नहीं होता