देखा है जबसे तुमको मेरा दिल नही है बस में
जी चाहे आज तोड़ दूं दुनिया की सारी रस्में
तेरा साथ चाहता हूं तेरा हाथ चाहता हूं
बाहों में तेरी रहना मैं दिन रात चाहता हूं
तुम आए तो मेरे इश्क में
अब बरकत होने लगी है
चुपचाप रहता था दिल मेरा
अब हरकत होने लगी है..
फिर वही दिल की गुज़ारिश फिर वही उनका ग़ुरूर,
फिर वही उनकी शरारत फिर वही मेरा कुसूर।
मोहब्बत क्या है चलो दो लफ़्ज़ों में बताते हैं,
तेरा मजबूर करना और मेरा मजबूर हो जाना।
” मोहब्बत ” करने वाले आशिक कम
ना होंगे पर तेरी महफिल मे हम ना होंगे
मरते कहाँ एक बार मे हैं मोहब्बत वाले दोस्तो।
अकेलेपन का जहर बार बार पीना पड़ता है।