फर्क चेहरे की हँसी पर सिर्फ इतना सा पाते है,
पहले आती थी अब लाते है।
“लोगों की सोच पर मै कुछ यूँ तमाचा जड़ देता हूँ !
व नफरत करते हैं जिससे मैं उसी से इश्क कर लेता हूँ।
मेरे बाकी उँगलियाँ भी
उस ऊँगली से जलती है,
जिस ऊँगली को पकड़ कर
मेरी जान चलती है...🥀☘️!
😭 रूला कर
👸उसने मुझसे😌 कहा😔…..
अब मुस्कुराओ 😀 !!
मै हँस😃 पडा_
_क्योकी ❓
सवाल ☺हँसी🚫 का नही ….
👸🏻उसकी खुशी☺का था !! .
दिल ना उम्मीद तो नही….नाकाम ही तो है,
लंबी है गम की शाम मगर शाम ही तो है…
मुझे अच्छा लगता है तुझसे गुफ्तगू करना
ऐसा लगता है कि लौट आया हो कोई अपना।