लौटा जब वो बिना जुर्म की सजा काटकर,
सारे परिन्दें रिहा कर दिए उसने घर आकर.
"अपने दिल से,एक झूठ रोज बोल देता हूँ,मोह्हबत नहीं है तुमसे, ये सोच लेता हूँ,डर है राज खुलते, तुम ख़फ़ा ना हो जाओ,जितनी हो बहुत हो, ये किस्मत मान लेता हूँ l
"ग़र जुदाई से खुश हो,तो जुदाई माँग लेता,
मुझसे तेरी नासाज तबीयत ना मांगी जायेगी l"
ज़िंदगी जब देती हैं तो एहसान नहीं करती
और जब लेती हैं तब लिहाज नहीं करती,
दुनिया में दो पौधे ऐसे हैं जो मुरझाते नहीं हैं,
और अगर मुरझा गए तो उनका कोई इलाज़ नहीं होता.
पहला- निःस्वर्थ प्रेम
दूसरा- अटूट विशवास
सुप्रभात