सब फूल लेकर गए मैं कांटे ही उठा लाया;
पड़े रहते तो किसी अपने के पाँव मे जख्म दे|
इजहार-ए-मोहब्बत पे अजब हाल है उनका,आँखें तो रज़ामंद हैं लब सोच रहे हैं।
देखो फिर रात आ गयी,
गुड नाईट कहने की बात याद आ गयी,
हम बैटे थे सितारों की पनाह मैं,
चांद को देखा तो आप की याद आ गयी।
Good Night
उन्हें इश्क़ हुआ था
मझे आज भी है....!
वो किसी अखबार में किस्सा हो जाये,कभी मेरे मोह्हबत का भी हिस्सा हो जाये l
ये वक़्त बेवक़्त मेरे ख्यालों
में आने की आदत छोड़ दो तुम,
कसूर तुम्हारा होता है और
लोग मुझे आवारा समझते हैं