मेरी यादों में आती रही रात भर,सोते -सोते जगाती रही रात भर lकहता किससे और किससे मैं क्या बोलता,प्यार से वो रुलाती रही रात भर l
तुम चाँद, मैं चकोर हो जाता,ये रात तुम्हें देखते बिताता lभींगता तुम्हारी शीतलता मैं,प्यार सारा आँखों मैं आ जाता l
शुभ रात्रि
वो एक रात जला……. तो उसे चिराग कह दिया !!!
हम बरसो से जल रहे है ! कोई तो खिताब दो .!!!