छुप गए वो साज़-ए-हस्ती छेड़ कर
अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
खुदा करे वो मोहब्बत जो तेरे नाम से है,हजार साल गुजरने पे भी जवान ही रहे।
रूठे तो इक लफ्ज़ नहीं कहती है मुंह सेबस खाने में नमक ज़्यादा कर देती है..
"आप तो मोहब्बत कीजिए साहेबनाराज़ तो हमसे ज़माना रहता है.!"
ये बैचनी जो मेरे घर आई है,ना जाने कौनसा दर्द साथ लाई है lक्यों नज़र को, नज़र की तालाश है,क्या ये काँटों से भरा गुलाब है,या दूर कुसुमित फूल पलाश है l
इकरार और इजहार के बाद भीबदल जाता प्यार है,बस मोह्हबत एक तरफ़ा ही सहीइसमें हार में भी प्यार है l