देखे चाँद ना सूरज ,ये दिल बस तेरा मुरीद जो गया lजो हुए जब-जब तुम्हारे दीद,वो हर लम्हा मेरे लिए ईद हो गया l
"एक बटन के फासले पे ज़िंदगी थी,किसी से पहले पर दबाया ना गया lमिट जाते सारे दिलों के फासले 'जाना',इश्क़ में अहं को भुलाया ना गया l"
ऐसे उसका ख़त कई बार पढ़ता हूँ,जैसे मैं इश्क़ की गली से गुजरता हूँ lहर बार रुकता हूँ उसी शब्द पे,जो बताता की, मैं उसके दिल में रहता हूँ l
खोज के बाहर तुमको,
हार गया हूँ मैं,
झाँका जब मन भीतर,
वंही बैठी थी तुम l