तुम आईना क्यूं देखती हो?बेरोज़गास करोगी क्या मेरी अॉखों को..
तुम आईना क्यूं देखती हो?
बेरोज़गास करोगी क्या मेरी अॉखों को..
कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
तरस जाओगे हमारे मुँह से सुनने को एक लव्ज़
प्यार की बात क्या, हम शिकायत भी ना करेंगे…
ये दबदबा,ये हुकुमत,ये नशा, ये दौलतें………
सब किरायदार है, घर बदलते रहते हैं……
तू वाकिफ़ नहीं मेरी दीवानगी से…
जिद्द पर आऊँ तो..ख़ुदा भी ढूंढ लूँ …