टिक टिक करते घड़ियों के कांटे,
उम्र ढल रही मेरी बताते रहते है…
क्या दास्तान सुनाऊं तुमको अपनी मोहब्बत कीबस मिलकर बिछड़ गया महबूब इतना जान लो
मोहब्बत नाम है जिसका वो ऐसी क़ैद है यारों,कि उम्रें बीत जाती हैं सजा पूरी नहीं होती।
देखो फिर रात आ गयी,
गुड नाईट कहने की बात याद आ गयी,
हम बैटे थे सितारों की पनाह मैं,
चांद को देखा तो आप की याद आ गयी।
Good Night
उन्हें इश्क़ हुआ था
मझे आज भी है....!
यादें मरती नहीं मार डालती है