ख्वाहिश इतनी है कि कुछ
ऐसा मेरे नसीब में हो,
वक्त चाहे जैसा भी हो
बस तू मेरे करीब हो।
इन आंखों में जो तस्वीर है वो तेरी है,
दिल की हर धड़कन बस तेरी है,
नहीं चाहिए सारे जहां की खुशियां मुझे,
खुदा करे तुझे मिल जाए,
वह सारी खुशियां जो मेरी है।
जो वक़्त तेरे साथ में बिताते थे | आज तेरी याद में बिताते है |
ये मत समझना हम भूल गये तुम्हे | फर्क सिर्फ इतना है |
जो वक़्त हष के बीतते आज रोके बिताते है |
किस्सा आज खत्म कीजिए,
हम पसंद हैं तो इज़हार कीजीए
हटाओ हाथ आंखों से,
ये तुम हो जानता हूं, मैं।
तुम्हें खुशबू नहीं,
आहट से भी पहचानता हूं, मैं।
“नशा कोई भी हो जान लेवा ही होता है .
.यकीन तब हुआ जब तेरी लत लगी।”