हटाओ हाथ आंखों से,
ये तुम हो जानता हूं, मैं।
तुम्हें खुशबू नहीं,
आहट से भी पहचानता हूं, मैं।
आदत है या तलबइश्क है या चाहततू दिल मे है या साँसों मेतू दीवानगी है या मेरी आशिकीतू ज़िन्दगी है या फिर एक किस्सापर जो भी है सिर्फ तू है
Yaad rahega ye dour- E hayaat humko
Ki tarse the zindgi me zindgi ke liye
हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर,तुझ पर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा,ना रोते हम यूँ तेरे लिये..अगर हमारी ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता..
मत पूछ कैसे गुज़र रहा है हर पल मेरा तेरे बिना,कभी बात करने की हसरत कभी मिलने की तमन्ना…