हटाओ हाथ आंखों से,
ये तुम हो जानता हूं, मैं।
तुम्हें खुशबू नहीं,
आहट से भी पहचानता हूं, मैं।
Us Fiza Mein Bhi Jalta Raha
Mein Kisi Ke Liye…..
Jaha Charaag Bhi Taraste They Roshni Ke Liye…
Khuwab aankhon se churana meri aadat nhi..!!
kisi apne ko bhulana meri aadat nahi..!!
Palkain bhigo Leta hon apno ki yaad me..!!
Mgr kisi ko rulana meri aadat nahi…!!
बरस रहे बादल आँखे रो रहीतन्हाई हर बात कह रहीजाये तो कहा जायेहर ओर गम की हवा चल रहीबड़ा अजीब मंजर है इश्क कामर चुका मानस मगर साँस चल रही
मजबूती से बाहों में,
इस कदर थाम लूं तुझे…
की मेरे इश्क़ की कैद सेतू चाहकर भी ना छुड़ सकें…❤️