कुछ कस्में हैं जो हम आज भी निभा रहे हैं,
तुम्हें चाहते थे और तुम्हें ही चाह रहे हैं!
मोहब्बत इतनी कि उसके सिवा कोई और ना भाए
इंतज़ार इतना कि मिट जाए पर किसी और को ना चाहे !
कैसे कह दूँ इश्क नहीं है तुमसे,
मेरे लिए इश्क का मतलब ही तुम हो !
दिल पर आये इल्ज़ाम से पहचानते हैं,
अब लोग तो मुझे तेरे नाम से पहचानते हैं !
मेरी ज़िंदगी के हिस्से की धुल हो तुम,
जो दिल में खिले वो फूल हो तुम,
अब मेरे हर लम्हे में क़ुबूल हो तुम !
“ना चाहो किसी को ऐसे कि,
चाहत आपकी मज़बूरी बन जाए,
पर चाहो किसी को इतना कि,
आपका प्यार उसके लिए जरुरी बन जाए॥”