मेरी ज़िंदगी के हिस्से की धुल हो तुम,
जो दिल में खिले वो फूल हो तुम,
अब मेरे हर लम्हे में क़ुबूल हो तुम !
चाँद तारो से रात जगमगाने लगी,
फूलों की खुश्बू से दुनिया महकने लगी,
सो जाइये रात हो गयी है काफ़ी,
निंदिया रानी भी आपको देखने है आने लगी
काश यह जालिम जुदाई न होती!
ऐ खुदा तूने यह चीज़ बनायीं न होती! न
हम उनसे मिलते न प्यार होता!
ज़िन्दगी जो अपनी थी वो परायी न होती!
हँसी आपकी कोई चुरा ना पाये,
आपको कभी कोई रुला ना पाये,
खुशियों का दीप ऐसे जले ज़िंदगी में..
कि कोई तूफ़ान भी उसे बुझा ना पाये।
Dil ko teri hi tamanna
Dil ko tujhse hi pyaar
Chahe tu
Aaye ya na aaye
Hum karenge intezar