पता नहीं कितना अंधकार था मुझमें,मैं सारी उम्र चमकने की कोशिश में बीत गया ।
एक डर सा लगा हुआ है मुझे,वो बिना शर्त चाहता है मुझे ।
"बहुत राहत है, तुम्हारे ख्यालों में,उसके आहट से भी ग़म दूर होते है l"
मैंने लिख दिए है, गीत तुम्हारे लिए,जब भी जी चाहे गुनगुना लेना,हम सदा थोड़ी रहंगे,नाराजगीं के लिए तेरे पास,आज हूँ, थोड़ा मुस्कुरा लेना l
हिम्मत नहीं अब बहस करने की
जो तुम कहो वही ठीक है !