कविता के कई मतलब हो सकते हैपर कविता कभी मतलबी नहीं हो सकती !!
एक तरफ ढल रहा दिन,एक तरफ अंधेरा आ रहा है,बस याद है कि अब,ना आ रहा है, ना जा रहा है l
"ना जाने क्यों इतनी बेचैनी बढ़ जाती है,कोई बात कभी जहन में अटक जाती है,वैसे तो सब बेहतर है, कोई ग़म नहीं है,जब देखता हूँ तुमको, साँसे अटक जाती है l"
"कतरा-कतरा रौशनी का,होके हम जल जायेंगे..हो अंधेरा कितना घना भी,भोर बनके आयेंगे.... "
दो मिनट मिल जाएँ आँखे, तो वक़्त ठहर जायेगा,जानती हो!एक समंदर दो आँखों में उतर आएगा l