अपेक्षाएं जहां खत्म होती हैं,सुकून वहीं से शुरू होता है !
"हर नज्म में तुमको लिखा है,हर शब्द में तुमसे मिला है,ये दिल आवरगी में भी रहा हो,कलम उठा तुमसे ही मिला है l"
ये इश्क़ सिर्फ मेरा है,ये अश्क़ सिर्फ मेरा है lकिसी से कह नहीं सकता,वो शख्स सिर्फ मेरा है l
"अगले पल ज़िंदगी ना जाने,कौन सा रंग दिखायेगी lहम है,रोज नये सपने खरीदते है,ना जाने वो,कैसे फ्रेम में आएगी l"
इकरार करने में शब्दों का होना लाज्मी नहीं
दिल के जज्बात ही काफी हैं
आंखें बयान कर देती हैं दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफ्जों की मोहताज़ नही होती