इश्क़ में मिले दर्द तो रोना कैसा यार,
यही एक जख़्म हम हँस के रखते है l
जी चाहे कि दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर,दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।
कौन सी लत ये मुझे सोचने की लग गई हैफ़ैसले कितने हुआ करते थे आसान मेरे
माँ की सी मुझे नज़र दे ऐ खुदाकि ज़माना मुझे फिर बुरा न लगे।
"तेरी चार बातें, मुस्कुरा के सुन लेता हूँ,तुमसे हार कर, तुमको जीत लेता हूँ l"