जी चाहे कि दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर,दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।
ये जो मीठा सा दर्द,जब तेरी बातों से होता है lमोह्हबत है मेरे अंदर,इसका एहसास होता है l
कौन सी लत ये मुझे सोचने की लग गई हैफ़ैसले कितने हुआ करते थे आसान मेरे
गुस्सा ना जाने,सारा कहाँ खो गया lउसकी आवाज़ सुनी,मन फिर उसका हो गया l
"तेरी चार बातें, मुस्कुरा के सुन लेता हूँ,तुमसे हार कर, तुमको जीत लेता हूँ l"