" एक झूठ बोल के तुम्हें मैं,अपने पास रख लेता मगर,साथी मैं लंबे सफऱ का था,इसलिए सच बोल दिया...l"
बड़ी मासूम सी लगती है,ये कार्तिक की भोर lलगता है ओढे आई एक चादर,मन लगता नाचे जैसे मोर l
"मैं सिसकियाँ ले रो भी नहीं सकता,
मुस्कुराने का उससे वादा किया है l"
साथ रहने की क़ीमत,क्या चुकाता,बे-मोल को कैसे,मिलता कोई अनमोल...
बिना दोस्त बने,
कोई अच्छा प्रेमी
नहीं हो सकता,
कभी देखा है तुमने,
रेत में गुलाब,
खिलते हुए l
सज रही हैं खुशियों की महफ़िल,
सज रहे समाज हैं हो ये खुशहाल.
सलामत रहे आपकी पूरी जिंदगी,
मुबारक हो नया साल।