सोचते -सोचते गुजरा,मीलों का सफ़र lकब लगी आँखना थी नींद को भी खबर lजागते-जागते यूँ ही,रात गुजर जाती है l
शुभ रात्रि
चाँद की चाँदनी से एक पालकी बनायी है,ये पालकी हम ने तारों से सजाई है,ऐ हवा ज़रा धीरे-धीरे ही चलना,मेरे दोस्त को बड़ी प्यारी सी नींद आई है।शुभरात्रि।