वो सर्द फासला बस आज कटने वाला था,
मैं इक चराग की लौ से लिपटने वाला था!!
एक लम्हें में हुआ था फासलों का फैसला,
फिर यकीं दिल को दिलाने में ज़माने लग गये!
फासला अब भी दो क़दमों का ही है,
पहले कदम कौन बढ़ाए, तय ये नहीं है.
जब हमारे बीच फासलें थे तब एक उम्मीद थी,
आज तू करीब है फिर भी कोई उम्मीद नहीं.
फासला रख के भी क्या हासिल हुआ,
आज भी उस का ही कहलाता हूँ मैं.
"कुछ हसरते अधूरी ही रह जाये तो अच्छा है,कुछ बात अनकही रह जाये तो अच्छा है,उधार में रह गये जैसे पैसे याद रह जाते है,कुछ अधूरा रह गया प्यार भी अच्छा है l"