बारिश और मोहब्बत दोनों ही, यादगार होते है
बारिश में जिस्म, भीगता है और मोहबत में आंखे..!!
जब बारिश की बूंदें तुम्हारी यादों के साथ गिरती हैं,
तो दिल में तन्हाई की आहट सी सुनाई देती है…!
बारिश में चलने से एक बात याद आती है,
फिसलने के डर से वो मेरा हाथ थाम लेता था।
मुझे मिलने मेरी औकात आयी है ,
मकान कच्चा है और बरसात आई है।
वो मेरे रु-बा-रु आया भी तो बरसात के मौसम में,
मेरे आँसू बह रहे थे और वो बरसात समझ बैठा।
"सारी कायनात उदास सी लगती है,
मेरी हमसफऱ मुझसे खफ़ा जो रहती है,
कोई इशारा हो कोई समझाये उन्हें,
बरसती नहीं बूँद,जमीं इंतजार में फटती है l "