अपना साया भी अज़नबी सा लगे,
जब उम्र किसी की तन्हाई में कटे!
युं नज़र से बात की
और दिल चुरा ले गये…..
हम तो अजनबी समझते थे आपको
आप तो हम को अपना बना गये….
लगने लगते है अपने भी पराये
और एक अजनबी पर ऐतवार हो जाता है
उस मोड़ से शुरू करनी है फिर से जिंदगी,
जहाँ सारा शहर अपना था और तुम अजनबी…
खौफ नहीं था , अजनबी से मुलाकात का…
फिक्र थी कि कोई रिश्ता ना बन जाए
अगर तुम अजनबी थे, तो अजनबी लगे क्यू नहीं…
अौर अगर मेरे थे तो मुझे मिले क्यूं नहीं…