उनकी आँखों से जो लफ्ज बया होते हे
वो शायरी में कहा होते हैं.
"उसकी हंसी के लिए तो हम जान दे दे अपनी बस शर्त है,
उनके आँखों में आंसू नहीं आना चाहिए। "
"कल रात बड़ी देर तक जागी थी आँखें,
ना जाने क्या समेट लेने की चाहत थी,
बार -बार खुलती, जाने क्या ढूंढ़ती थी आंखे,
क्या किसी परी के उतर आने की आहट थी l"
जो उनकी आँखों से बयान होते हैं ,वो लफ्ज शायरी में कहाँ होते हैं.
जो उनकी आँखों से बयान होते हैं ,
वो लफ्ज शायरी में कहाँ होते हैं.
चिरागों को आंखों में महफूज रखना,बड़ी दूर तक रात ही रात होगी,मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी,किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।
चिरागों को आंखों में महफूज रखना,
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी,
मुसाफिर हो तुम भी, मुसाफिर हैं हम भी,
किसी मोड़ पर, फिर मुलाकात होगी।
न जाने क्या है किसी की उदास आँखों मैं
वो मुंह छुपा के भी जाए तो बेवफ़ा न लगे