चिंकी चिड़िया और पागल हाथी

एक जंगल में एक आम के पेड़ पर एक चिंकी नाम की चिड़िया सालों से वहां रहती थी. उस आम के पेड़ की ऊँची डाली पर उसने अपना एक छोटा सा आशियाना बना रखा था. उस जंगल में उसके कई सारे दोस्त भी थे जिनमें एक कथपोड़वा, एक मेंढक और एक मधुमखी थी.

 ये चारों उस जंगल में बहुत ही मज़े से एक दूसरे के साथ रहते थे. एक दिन उस जंगल के दूसरे कोने से एक हाथी आकर वहां रहने लगा. वो हाथी बहुत ही ज़्यादा गुस्सैल और घमंडी था. चिड़ियाँ ने उस हाथी को पेड़ से आम तोड़ कर खाने के लिए दिया. उस दिन हाथी ने उन आमों को बहुत ही मज़े से खाये, बहुत दिन बीत गए. एक दिन वो हाथी बहुत गुस्से में था उसने उस जंगल के सभी पेड़ पौधे उखाड़ दिए. इस तरह उसने उस पेड़ को भी ज़ोर ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया जिसपर चिंकी रहती थीं,लेकिन वो पेड़ बहुत मज़बूत था उससे वो पेड़ नहीं गिरा लेकिन उसके कारण उस पेड़ के सारे आम नीचे गिर गए और साथ ही चिड़िया का घोसला भी नीचे गिर गया और उसके अंडे टूट गए. 

जब चिड़िया को इस बात का पता चला तब वो बहुत गुस्सा हुई और उसने उस हाथी को सबक सीखने की ठान ली. वो वहां से अपने दोस्तों के पास पहुँच गई. उसने अपने तीनों दोस्तों को पूरा क़िस्सा सुनाया फिर उन तीनों ने उसकी मदद के लिए तैयार हो गए. सबने एक प्लान बनाया और उस प्लान और तय समय पर तीनों तालाब के पास पहुँच गए. 

पहले मधुमक्खी ने हाथी के कान में गुनगुनाना शुरू किया और हाथी को उसकागीत पसंद आ गया, वो पूरी तरह उसके संगीत में खो गया. इसके बाद कठफोड़वा ने ने हाथी की दोनों आंखों पर वार कर दिया और इस अचानक हुए वार से हाथी दर्द की वजह से चिल्लाने लगा. इसके तुरंत बाद मेंढक अपने पूरे समूह के साथ मिलकर टर्राने लगे.  इतने सारे शोर की वजह से हाथी अपने आपे से बाहर हो गया और अचानक उस तालाब में गिर गया. कुछ देर बाद उसी तालाब के दलदल में वह फंसता चला गया और फिर बाद में तालाब के घड़ियालों ने उसे खा लिया.


शिक्षा- हमें कभी भी किसी निर्दोष का अहित नहीं करना चाहिए, इसका फल बहुत ही बुरा होता है.