प्यार के समंदर में सब डूबना चाहते हैं,प्यार में कुछ खोते हैं तो कुछ पते हैं,प्यार तो एक गुलाब है जिसे सब तोडना चाहते हैहम तो इस गुलाब को चूमना चाहते हैं.
सीतल-सीतल वायु चली,
आकाश हुआ सुहाना,
अनपढ़ भी व्हाट्सऐप पढ़ने लगे,
शिक्षित हुआ ज़माना....
गुज़र गया वो वक़्त जब तेरे तलबगार थे हम.
अब खुद भी बन जाओ तो सजदा न करेंगे..!
कितने आंसू बहूँगा उस बेवफा के लिए
जिसको खुदा ने मेरे नसीब मैं लिखा ही नहीं….
हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का,
कैसे बना था घोसला वो तूफान क्या जाने !