“वफादारी की बात सांप किआ नहीं करते वफादारी की बात सांप किआ नहीं करते,क्या कहा आपने, “मोहब्बत”अरे भाई,हम ऐसे पाप किया नहीं करते…”
“वफादारी की बात सांप किआ नहीं करते वफादारी की बात सांप किआ नहीं करते,
क्या कहा आपने, “मोहब्बत”अरे भाई,
हम ऐसे पाप किया नहीं करते…”
अब तो मज़हब कोई ऐसा भी चलाया जाए,
जिसमें इंसान को इंसान बनाया जाए|
अच्छाई और बुराई दोनों हमारे अंदर हैं
जिसका अधिक प्रयोग करोगे वो उभरती व निखरती जायगी
यकीन और दुआ नज़र नहीं आते मगर,
नामुमकिन को मुमकिन बना देते हैं।
स्वास्थ ही असली सोना हैं,जो स्वस्थ नहीं उसे जीवन भर रोना हैं.
स्वास्थ ही असली सोना हैं,
जो स्वस्थ नहीं उसे जीवन भर रोना हैं.