सियासत अपनी चालों से कब तक किसान को छलता रहेगा.
त्याग दी सब ख्वाहिशें
कुछ अलग करने के लिए
“राम” ने खोया बहुत कुछ
“श्री राम” बनने के लिए
दुःख में इंसान ईश्वर को याद करता है लेकिन सुख में इंसान ईश्वर को भूल जाता है।
अगर सुख में भी इंसान ईश्वर के करीब रहे तो दुःख ही क्यों हो
बुराई को देखना और सुनना ही
बुराई की शुरुआत है
आकाश से ऊँचा कौन – पिता
धरती से बड़ा कौन – माता