बे-ख़्वाबी कब छुप सकती है काजल से भी,
जागने वाली आँख में लाली रह जाती है!
Aye khuda
kuch nahi maanga tujhse
Aaj ek dua poori karde
Maut maang raha hu dede..!
मैंने ज़माने के एक बीते दोर को देखा है
दिल के सुकून को और गलियों के शोर को देखा है
मैं जानता हूँ की कैसे बदल जाते हैं इन्सान अक्सर
मैंने कई बार अपने अंदर किसी ओर को देखा है।
तेरा इंतेज़ार मुझे हर पल रहता है,
हर लम्हा मुझे तेरा एहसास रहता है,
तुझ बिन धड़कने रुक सी जाती है,
की तू मेरे दिल मे मेरी धड़कन बनके रहता है!!
अब तू नहीं है दुनिया में,
हु अकेला वही खड़ा,
तू मुमताज़ तो बन गयी
मै रह गया निचे पड़ा!
गुलाब को भी कमल बना देते,
उसकी एक अदा पे कई ग़ज़ल बना देते…
कम्भख्त मरती नहीं मुझ पर लडकियां,
वरना लखनऊ में भी ताजमहल बना देते…