कांटों से घिरा रहता है चारों तरफ से फूल
फिर भी खिला रहता है, क्या खुशमिजाज़ है
तालीम नहीं दी जाती
परिंदो को उड़ानों की……..
वह तो खुद ही समझ
जाते हैं उच्चै आसमानो की…
तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो,
दिल मेरा था और धड़क रहा था वो,प्यार का तालुक भी अजीब होता है,आंसू मेरे थे सिसक रहा था वो..
Hamen Taameer Ke Dhokhe Mein Rakhakar Hamaare Khvaab Chunavaaye Gae Hain
Kaanton Se Nibana Aadath Si Ho Gayi Hai,
Yeh Gham Sehne Ki Ab Aadat Si Ho Gayi Hai,
Phoolon Se Darr Lagtha Hai Humme,
Yaadon Mein Bhatakne Ki Aadath Si Ho Gayi Hai…!!!