जब कभी सिमटोगे तुम...मेरी इन बाहों में आकर मोहब्बतकी दास्तां मैं नहीं मेरी धड़कने सुनाएंगी।
मेरी इन बाहों में आकर मोहब्बत
की दास्तां मैं नहीं मेरी धड़कने सुनाएंगी।
मुहब्बत खूबसूरत होती होगी किसी और ज़माने में
हमपे जो गुजरी है वो हम ही जानते हैं
इक उम्र तक मैं जिसकी जरुरत बना रहा
फिर यूँ हुआ कि उस की जरुरत बदल गई।
याद आयेगी हमारी तो बीते कल को पलट लेना ..
यूँ ही किसी पन्ने में मुस्कुराते हुए मिल जायेंगे ..
सर्दी में भी ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए,
ज्यादा ठंड लगे तो रजाई में घुस जाना चाहिए…