चलो आज खामोश प्यार को इक नाम दे दें,अपनी मुहब्बत को इक प्यारा अंज़ाम दे देंइससे पहले कहीं रूठ न जाएँ मौसम अपनेधड़कते हुए अरमानों एक सुरमई शाम दे दें !
पलकों से रास्ते के काटे हटा देंगे,
फूलों को क्या हम अपना दिल बिछा देंगे।
टूटने ना देंगे अपनी दोस्ती को कभी,
बदले में हम खुद को मिटा लेंगे।।
वो पड़ोसन भी आतंकवादी से कम नहीं होती...
जो नई साड़ी ख़रीद कर सीधे आप की बीबी को दिखाने आती है....
ससुर -- तुम दारू पियत हो
कभी बताये नाही ॥
दामाद -- तोहार लड़की
खून पियत है, तुम बताय का??
जिन्दगी एक जंग है,
जबतक बीवी संग है.
लोगों को पता नहीं कैसे सच्चा
प्यार मिल जाता है...
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हमें तो सुबह पलंग के नीचे
उतारी चप्पल नहीं मिलती।
😝😝