मेरी मंज़िल मेरे करीब है इसका मुझे एहसास हैगुमान नहीं मुझे इरदों पे अपनेये मेरी सोच अौर हौंसलों का भी विश्वास है
मेरी मंज़िल मेरे करीब है इसका मुझे एहसास है
गुमान नहीं मुझे इरदों पे अपने
ये मेरी सोच अौर हौंसलों का भी विश्वास है
अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों,जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।
न सोचा मैंने आगे,
क्या होगा मेरा हशर,
तुझसे बिछड़ने का था,
मातम जैसा मंज़र!
तुम्हारे प्यार का मौसम
हर मौसम से प्यारा है
याद आयेगी हमारी तो बीते कल को पलट लेना ..
यूँ ही किसी पन्ने में मुस्कुराते हुए मिल जायेंगे ..