अब तो कुछ भी चाहने से भी डर लगता है मुझको क्योंकि, जो भी चाहा आज तक मुझे वो हमेशा ही नहीं मिला,गुस्सा मुझे इस बात का नहीं है की जो सोचा वो नहीं मिला, बल्कि इस बात का है कि मैंने किसी को चाहा पर मुझे चाहने वाला नहीं मिला। 😠😓
अब तो कुछ भी चाहने से भी डर लगता है मुझको क्योंकि,
जो भी चाहा आज तक मुझे वो हमेशा ही नहीं मिला,
गुस्सा मुझे इस बात का नहीं है की जो सोचा वो नहीं मिला,
बल्कि इस बात का है कि मैंने किसी को चाहा पर मुझे चाहने वाला नहीं मिला। 😠😓
अपने खिलाफ बाते खामोशी से सुन लो,यकीन मानो वक्त बेहतरीन जवाब देगा।
कैसे एक लफ्ज़ में बयां कर दूँ
दिल को किस बात ने उदास किया
“आँखों से दूर दिल के करीब था,
में उस का वो मेरा नसीब था.
न कभी मिला न जुदा हुआ,
रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था.”
आज किसी की दुआ की कमी है,तभी तो हमारी आँखों में नमी है,कोई तो है जो भूल गया हमें,पर हमारे दिल में उसकी जगह वही है..