दिलों को मिलाने का मौसम है,
दूरियां मिटाने का मौसम है,
होली का त्यौहार ही ऐसा है,
रंगों में डूब जाने का मौसम है.
लम्हे वो कुछ खास होते है…तू जो मेरे पास होती है…बाहों में तेरा कुछ होता ऐसा एहसास है..डेरी मिल्क और पार्क की जो मिठास है…!
चाहता कौन है बेवफ़ायी करना
उसने परिवार सम्भाला होगा
यही सोच कर समझाता हूँ ख़ुदको
मजबूर होकर मुझे दिल से निकाला होगा
कुछ लुटकर, कुछ लूटाकर लौट आया हूँ,
वफ़ा की उम्मीद में धोखा खाकर लौट आया हूँ |
अब तुम याद भी आओगी, फिर भी न पाओगी,
हसते लबों से ऐसे सारे ग़म छुपाकर लौट आया हूँ |
“आँखों से दूर दिल के करीब था,
में उस का वो मेरा नसीब था.
न कभी मिला न जुदा हुआ,
रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था.”