बनकर तेरा साया तेरा साथ निभाऊंगा..
तू जहाँ जहाँ जाएगी मैं वहाँ वहाँ आऊँगा..
साया तो छोड़ जाता है अँधेरे में साथ
लेकिन में अँधेरे में तेरा उजाला बन जाऊँगा.
मेरी खमोशियो के राज़ ख़ुद मुझे ही नहीं मालूम…
जाने क्यू लोग मुझे मगरूर समझते है…
हमारी तड़प तो कुछ
भी नही है हुजुर
सुना है कि उसके दिदार के
लिए तो आईना भी तरसता है
विपरीत परस्थितियों में कुछ लोग टूट जाते हैं ,
तो कुछ लोग लोग रिकॉर्ड तोड़ते है
मेरी इबादतों को ऐसे कर कबूल ऐ मेरे खुदा,
के सजदे में मैं झुकूं तो मुझसे जुड़े हर रिश्ते की जिंदगी संवर जाए..!!