मुझे समझना है, तो बस अपना समझ लेना।
क्योंकि हम अपनों का साथ, खुद से भी ज्यादा निभाते हैं।
भरोसा क्या करना गैरों पर,जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।
मैं तमाम दिन का थका हुआ,
तू तमाम शब का जगा हुआ,
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर,
तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ।
Mai To Chirag Hu Tere Aashiyane Ka
Kabhi Na Kabhi To Bujh Jaunga
Aaj Shikayat Hai Tujhe Mere Ujaale Se
Kal Andhere Mein Bahot Yaad Aaunga…
उसने कहा चले जाओ
मेरी ज़िन्दगी से,
मेने कहा कौन हो तुम
भाईसाहब!!