Aankhon Ko Koi Khwaab Tou Dikhayi De Tabeer Me Imam Ka Jalwa Dikhayi De Aye ! Ibn-E-Murtuza Tere Saamne Suraj Bhi Ek Chota Sa Zarra Dikhayi De.
चाहत तुम्हारी - रविवार की तरहहकीकत जिंदगी - सोमवार की तरह...!!
“लोग क्या कहेंगे”- ये बात इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती
अपनी कमियाँ पूरी दुनिया से छिपाइए,
लेकिन अपनी कमियाँ कभी खुद से मत छिपाइए
अपनी कमियाँ खुद से छिपाने का मतलब होता है,
अपने आप को खुद बर्बाद करना
पैसे से बिस्तर खरीदा जा सकता है, नींद नहीं
पैसे से महल खरीदा जा सकता है लेकिन खुशियाँ नहीं