अपनी तकदीर जगाते हैं मातम से
खून की राह बिछाते हैं तेरे मातम से
अपने इज़हार-ए-अकीदत का सलीका ये है
हम नया साल मनाते हैं तेरे मातम से |
घमंड ही नहीं गुरुर है अपने किसान होने का।
बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की
“उनसे कहना की क़िस्मत पे ईतना नाज ना करे ,
हमने बारिश मैं भी जलते हुए मकान देखें हैं…… !!
सारे सबक किताबों में नहीं मिलते यारो
कुछ सबक जिंदगी भी सिखाती है
हर पल में प्यार है हर लम्हे में ख़ुशी है,खो दो तो याद है जी लो तो ज़िन्दगी है।