बेशक मेरे नजदीक मौत कामयाबी के सिवा कुछ नहीं है
और जालिम के साथ ज़िन्दगी गुजारना
जिल्लत के सिवा कुछ नहीं है
अमर वही इंसान होते हैं
जो दुनियां को कुछ देकर जाते हैं
घमंड ही नहीं गुरुर है अपने किसान होने का।
बढ़ रही हैं कीमते अनाज की,
पर हो न सकी विदा बेटी किसान की
भय से तब तक ही डरना चाहिये जब तक भय (पास) न आया हो। आये हुए भय को देखकर बिना शंका के उस पर् प्रहार् करना चाहिये।
बुराई को देखना और सुनना ही
बुराई की शुरुआत है