Aaj Ki Is Barish Me
Sath Tum Nhi Ho To,
Aankh Nam Si Kitni Hai,
Saans Tang Si Kitni Hai,
Rooh Pyasi Kitni Hai
Yeh Udaasi Kitni Hai,
Aaj Ki Is Barish Me.
मौसम था बेकरार तुम्हें सोचते रहे,कल रात बार बार तुम्हें सोचते रहेबारिश हुई तो लग कर घर के दरवाजे से हमचुप चाप बेकरार तुम्हें सोचते रहे...
मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में ना बैठोवो बरसो में कभी बरसे, यह बरसो से बरसती है|
कभी शोख हैं,
कभी गुम सी है..
ये बारिशे भी तुम सी है..