मैं मैं ना रहा
तू तू ना रहा
सब अपने हो गए
माँ की नज़रों में जो देखा
सब सपने सच हो गए
बस यही आशा रखता हूँ |
मेरे बारे में अपनी सोच को थोड़ा बदलकर देख,
मुझसे भी बुरे हैं लोग तू घर से निकलकर देख…!
जिंदगी का हर लम्हा कुछ सिखाता है
इस साल ने भी बहुत कुछ सिखाया है
नया सीखते रहिये कभी तो काम आएगा
आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें
मैं कुछ लम्हा और तेरे साथ चाहता था;
आँखों में जो जम गयी वो बरसात चाहता था;
सुना हैं मुझे बहुत चाहती है वो मगर;
मैं उसकी जुबां से एक बार इज़हार चाहता था।
चाहता कौन है बेवफ़ायी करना
उसने परिवार सम्भाला होगा
यही सोच कर समझाता हूँ ख़ुदको
मजबूर होकर मुझे दिल से निकाला होगा